स्‍क्रोफोलोसो-5 डॉ0 सत्‍यम सिंह चन्‍देल , बी0 एच0 एम0 एस0 , एम0 डी0 (ई0)

                                                           स्‍क्रोफोलोसो-5


स्‍क्रोफोलोसो-5 दवा में निम्‍न औषधी पौधों को एक निश्चित अनुपात में मिश्रित कर बनाई गयी है । यह इलै0होम्‍यो0 की मूल औषधिय है ।



क्र0

औषधिय पौधों के नाम

उपयोग मात्रये प्रतिशत में

1

 BERBERIS VULGARIS

20

2

 COCHLERIA  OFFICINALIS  

25

3

HYDRASTIS  CANADENSIS

20

4

CHAMOMILLA

10

5

NASTURTIUM  OFFICINALE

5

6

 SCROFULARIA  NODOSA

20

7

SMILAX  MEDICA

5

8

TUSSILAGO  FAREFARA

5

9

VERONICA  OFFICINALIS

20

 

    लीवर :- स्‍क्रेाफोलोस-5 लीवर की महौषधी है । इस औषधी का मुख्‍य कार्य लीवर एंव उसके टिश्‍यूस पर होता है , यह लीवर के संचालक पेशियों एंव संचालक स्‍नायुओं पर होने से, यह शरीर के समस्‍त अवयवों को क्रियाशील करती है, साथ ही यह शरीर के समस्‍त ग्रन्थियों के सूत्रों अर्थात टिश्‍यूस , स्‍पाईनल नर्व, एंव विशेष रूप से चलायमान मोटर नर्व,  लीवर से जुडी समस्‍त बीमारीयों में, तथा लीवर की वजह से गालब्‍लेडर का सिकरेशन कम या अधिक होने के कारण बाईल का निर्माण्‍ न हो रहा हो जो हमारे भोजन को डाईजेस्‍ट करती है यह दवा गालब्‍लेडर के सिकरेशन व उसके प्रोडेक्‍शन को ठीक करती है । लीवर की खराबी की वजह से टाक्‍सीन (दूषित तत्‍वों ) के जमा होने से शरीर में जो गांठे,  फोडे , गैगरीन आदि होते है उसमें उपयोगी है , इसके अतरिक्‍त लीवर का फैटी या बढ जाना , लीवर सोसाईसिस, आदि में इसका उपयोग किया जाता है ।  यह दवा एन्‍टीआक्‍सीडेन्‍ट है , ग्रंथ्रियों में प्रभावी होने से गिल्‍टीयों की सूजन से उत्‍पन्‍न होने वाले रोगों में , क्षय रोग को ठीक करने वाली एंव पोषण करने वाली दवा है , 

यूरिक ऐसिड :- यह शरीर से यूरिक ऐसिड को निकालती है इस लिये इसका उपयोग जोडों के दर्दो व गठिया आदि में किया जाता है इसका प्रभाव जोडोसंधियों एंव रीड की हड्डीयों पर होने से इससे उत्‍पन्‍न होने वाले समस्‍त प्रकार की बीमारीयों में इस दवा का प्रयोग किया जाता है । लीवर की जीर्ण अवस्‍था में इसका प्रयोग एफ ग्रुप की दवाओं के साथ करना चाहिये , साईटिका के रोग में इसका प्रयोग अपनी सहायक औषधियों के साथ करने से बहुत ही अच्‍छे परिणाम प्राप्‍त किये जा सकते है । इस दवा का प्रभाव स्‍क्रोफोलोस ग्रुप की अन्‍य औषधियों से  अत्‍यन्‍त गहरा है ।  यह दवा एस-2 एंव एस-3 की पूरक औषधिय है ।

पाचन तंत्र :- चूंकि इस दवा का प्रभाव पाचन तंत्र पर होने के कारण भूख का न लगनाहाईपर ऐसिडिटीअपचपेट में गैस बननाउल्‍टीकैदस्‍तकब्‍ज या पाचन से सम्‍बन्धि रोगों में इसका प्रयोग अपनी सहायक औषधियों के साथ कर उचित परिणाम प्राप्‍त किये जा सकते है ।

पथरी :- यह दवा गालब्‍लेडर की पथरी को गला देती है ,यह पथरी कही भी हो चाहे वह किडनी में हो या मूत्राश्‍य में हो उसे गला कर निकाल देती है ।

त्‍वचा रोग :-  इस दवा का प्रभाव त्‍वचा पर एंव उसके म्‍यूकस मेम्‍बरेन पर होने से यह त्‍वचा रोगो में अच्‍छा कार्य करती हैत्‍वचा में एक्‍जीमा,  सोराईसिस,  ल्‍युकेाडर्मा आर्टिकेरिया, आदि में इसका प्रयोग किया जाता है । यह दवा  त्‍वचा को चिकनामुलायम बनाती है, त्‍वचा रोग व त्‍वचा दोषों को दूर करने वाली दवा हैयह जीर्ण त्‍वचा रोगों की रामबाड औषधिय है । ऐडियों का फटनाधॉवो, गैगरीन,  जिद्दी किस्‍म के धॉवोंत्‍वचा का बदरंगा होनायह दवा धॉवों को भरने वाली एंव वहॉ की मॉस एंव त्‍वचा को चिकना करने वाली है ,   

अन्‍य :- किडनीमूत्राश्‍यलीवरऑतों पर कार्य करती है । यह दूषित तत्‍वों को शरीर से निकालने वाली औषधिय हैपुराना झुकाम,  झुकाम का बार बार बहना , मियादी बुखारपुरानी खॉसी आदि में इसका प्रयोग अपनी सहायक व पूरक औषधियों के साथ कर उचित परिणाम प्राप्‍त किये जा सकते है । बादी बबासीर ,विषैले जीव जन्‍तुओं के काटने पर इसका प्रयोग किया जा सकता है, यह दवा  शराब की इक्‍च्‍छा को दूर करने में सहायक है,  बहरेपन , शरीर के किसी भी भाग से र्दुगन्‍ध युक्‍त स्‍त्रावों का होना ,  नेत्र प्रदाह नेत्र में धॉव , स्‍वर यंत्र की सूजन , फीलपॉव , लकवा ,मॉसपेशियों का सिकुड जाना आदि में  । सभी तरह की सूजन को घटाने के लिये इसका प्रयोग आर0 ई0 के साथ करना चाहिये ।बालों के झडनें पर इसका प्रयोग अंतरिक तथा वाहय रूप से कर उचित परिणाम प्राप्‍त किये जा सकते है

डायल्‍युशन प्रथम डायल्‍युशन :- इसका पहला डायल्‍युश्‍न पथरी को गला देती है , त्‍वचा पर दाने निकलने पर , मॉसपेशियेा पर एंव लकवा आदि में

दूसरा डायल्‍युशन:- लीवर के कैंसर , गाठ , फोडा , लीवर सोराईसिस आदि में किया जाता है ।

तीसरा डायल्‍युशन :- त्‍वचा रोगों से जुडी समस्‍याओं पर किया जाता है ।

उच्‍च डायल्‍युशन :- ऊॅचे डायल्‍युशन का प्रयोग पुराने जीर्णप्रकार के रोगों में कर उचित परिणाम प्राप्‍त किये जा सकते है ।

                 डॉ0 सत्‍यम सिंह चन्‍देल

            बी0 एच0 एम0 एस0 , एम0 डी0 (ई0)    

              

 

              


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