कैंसरोसो-6डॉ0 सत्यम सिंह चन्देल , बी0 एच0 एम0 एस0 , एम0 डी0 (ई0)
कैंसरोसो-6
कैंसरोसो-6 में निम्म औषधिय पौघों को मिश्रित किया गया है इस समूह के सभी घटक विशेष कर किडनी एंव मूत्राश्य तथा उससे सम्बन्धित अंगों एंव सैल्स पर प्रभावी होते है जिस प्रकार कि एस-6 दवा लिम्फ तथा विशेष तौर पर मेटाबोलिजम की खराबी से आये किडनी रोगों पर कार्य करती है अत: हम कह सकते है कि किडनी व मूत्राश्य के रोगों के लिये ये एक दूसरी की पूरक औषधिया है ।
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क्र0 |
औषधिय पौधों के नाम |
उपयोग मात्रये प्रतिशत में |
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1 |
CONIUM
MACULATUM
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50 |
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2 |
PHYTOLACCA
DECANDRA
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20 |
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3 |
PIMPINELLA
SAXIFRAGE
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10 |
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4 |
RHUS
TOXICODENDRON
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50 |
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5 |
VINCITOXICUM
OFFICINALIS
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5 |
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कैंसरोसो-6
यह दवा किडनी रोगीयों के लिये जीवनदायनी औषधिय है । यह एक टयूशूज रिमेडी है । तथा एस-6
की पूरक औषधिय होने से यह किडनी की कम्पोजिशन उसके एनाटामी एंव फिजियोलाजिक में आई
खराबी जैसे किडनी का साईज बढ गया हो या कम हो गया हो ,किडनी में
सूजन ,किडनी के सभी प्रकार की समस्याओं के लिये यह दवा उपयोगी है । जब कभी हमारी
किडनी ठीक से कार्य नही करती है तो हमारे रक्त से दूषित तत्व शरीर से बाहर नही निकल
पाते ऐव वह शरीर में जमा होने लगते है , जैसाकि हमने स्क्रोफोलोस-6
में लिखा था कि किडनी का कार्य है रक्त से दूषित पदार्थो को फिल्टर करना एंव दूषित
पदार्थ जिसे विजातीय पदार्थ भी कहते है शरीर से बाहर करना , किडनी
के ठीक से कार्य न करने के कारण हमारे शरीर से विजाती तत्व बाहर नही निकल पाते इससे
शरीर में खनीज तत्व एंव यूरिक ऐसिड तथा दूषित पानी का जमाव होने लगता है खनीज के जमने
से पथरी बनने लगती है एव यूरिक ऐसिड जो हडियों एंव जोडों में जमा होने लगते है इससे
गठिया , एंव जोडों का र्दद होता है , इसी
प्रकार मॉस पेशियों में यूरिक ऐसिड के जमा होने से सूजन व मांसपेशियों का र्दद होता
है । अव्यर्थ तत्वों के शरीर से बाहर न निकलने के कारण शरीर में सिस्ट, टयूमर, गांठें ,आदि बनने लगती
है । किडनी के ठीक से कार्य न से रक्त के कम्पोजिशन में खराबी आती है, इसका प्रभाव हिद्रय की धडकने व ब्लड प्रेशर बढ जाता है अत: किडनी के ठीक
से कार्य न करने का परिणाम जहॉ किडनी मूत्राश्य पर होता है वही इसका प्रभाव हिद्रय
पर एंव पांचन तंत्र पर भी देखा जाता है । किडनी का ठीक से कार्य न करने से प्रोटिन , क्रेटिनिन , व यूरिया तथा यूरिक ऐसिड तथा अन्य खनीज तत्व का संतुलन बिगडने लगता है, पेशाब में प्रोटिन, व क्रेटिनिन आने लगता है । किडनी
की पथरी की यह विशेष दवा है , किडनी की पथरी को निकालने के लिये
इसकी पूरक औषधिय सी-6 एंव एस-6 का प्रयोग स्क्रोफोलोसो-6 में बतलाये अनुसार कर उचित
परिणाम प्राप्त किये जा सकते है । इसका प्रयोग यूरिनरी ट्रेक्ट या मूत्राश्य में
आई समस्याये , जैसे मूत्राश्य का संक्रामण इसकी बजह से बुखार
होने पर , मोतीझिरा , बहुमूत्र उसमें शक्कर
आना, मूत्रमार्ग में पीडा जलन , मूत्राश्य
की पीडा के कारण गर्भाश्य से रक्त स्त्राव होना,इस दवा का
प्रभाव गर्भाश्य पर भी है , मूत्राश्य का लकवा , हैजा,दस्त , त्वचा के रोगों
में जब अन्य औषधियों से लाभ न हुआ हो , आंतों का उलट जाना, जिद्दी प्रकार का कब्ज ,कान के बहने , अमाश्य के विकारों में जब गैस्ट्रिक
जुस का निर्माण न हो रहा हो , रक्त और रस के दूषित हो जाने पर
यह एस-6 की भांति कार्य करती है । यह दवा रक्त शोधक है एंव रक्त के कम्पोजिशन में
आई खराबी को संतुलित करती है । किडनी का शिथिल पड जाना ,किडनी
की सूजन ,मूत्र के साथ रक्त आना,श्वास
कष्ट , धमनीयों का कडे पड जाना ,गठिया,जोडो का टेडा पड जाना , जिद्दी प्रकृति के धॉव , अर्जीण अपच एंव छाती में जलन आदि में इसका प्रयोग किया जाता है ।
डायल्युश्न
:- प्रथम डायल्युश्न :- किडनी का अच्छे से कार्य न करने पर इसके प्रथम डाय0 के प्रयोग
से यह किडनी के कार्यो को बढा देती है, एंव शरीर से टाक्सीन
तत्वों को मूत्रमार्ग से निकालती है । पथरी
को निकालने में , पथरी की वजह से यदि मूत्र रूक गया हो ,
दूसरा
डायल्युश्न :-शरीर के सिस्ट गाठे, पथरी की वजह से सैल्स
की खराबी ,पेशाब में क्रेटिनिन, क्रिस्टल, प्रोटीन , पस सैल्स केक बढने पर
तीसरा
डायल्युश्न:- हाईड्रोनेफोसिस अर्थात शरीर में पानी भरने की स्थिति में , गुर्दे (किडनी) में सूजन ,आदि में ।
डॉ0 सत्यम
सिंह चन्देल
बी0 एच0 एम0 एस0
, एम0 डी0 (ई0)
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