ग्रीन इलैक्‍ट्रीसिटी ( हरी बिजली)

 

                 ग्रीन इलैक्‍ट्रीसिटी ( हरी बिजली)

 


 ग्रीन इलैक्‍ट्रीसिटी निम्‍न औषधिय पौधों से संगठन से बनाई गई है ।

क्र0

औषधिय पौधों के नाम

उपयोग मात्रये प्रतिशत में

1

ALTHEA OFFICINALIS

 

10

2

CONIUM MACULATUM

 

10

3

ERVUM LENS (Mash, Masur, Sabut Masur)

 

20

4

HAMAMELIS VIRGINICA

 

20

5

PHYTOLACCA DECANDRA

 

10

6

POPULUS ALBUS

25

7

POPULUS TREMULOIDUS

 

25

8

SAMBUCUS NIGRA

 

10

 ग्रीन इलैक्‍ट्रीसिटी शांती प्रदान करने वाली ऋणात्‍मक बिजली है । यह रक्‍त संचार को धीमा करती है ,

कैंसर, गाठों, दुषित पदार्थो को शरीर से निकालती है :- सभी तरह के कैंसर, गाठ, गुमड, कैंसर से पस या रक्‍त के रिसाव को यह ठीक कर देती है । पत्‍थर जैसी गाठ को यह गला कर, उसे निकाल देती है इसीलिये इसका प्रयोग पथरी को चूरा कर निकालने में किया जाता है । वेन्‍स अर्थात रक्‍त शिराओं के अन्‍दर किसी भी तरह की रूकावट, थक्‍का जमना, या टॉक्‍सीन (दूषित पर्दाथों) के जमने को यह उचित माध्‍यमों से निकाल देती है । यह दवा कैंसर नाशक , प्रदाह नाशक, उत्‍तेजना को शान्‍त करने वाली । कोई भी ऐसा धॉव जो नासूर बन गया हो उसे ठीक कर देती है , रिसाव वाले धॉवों में अच्‍छा कार्य करती है , कैंसर रोग में जब रोगी र्दद से परेशान हो तब इसे लगाने से ही र्दद कम हो जाता है,  इस दवा का प्रयोग कैसर की प्रत्‍येक अवस्‍थाओं में किया जाता है जैसे कैंसर से पस या रक्‍त के स्‍त्रावों हो रहा हो, गाठे हो तब इसका प्रयोग अपनी सहायक औषधियों के साथ करने पर अच्‍छे परिणाम प्राप्‍त किये जा सकते है , जैसा कि हमने पहले ही लिखा है कि यह गाठ, मस्‍सें, गुमड या पत्‍थरी या शिराओं में अनावश्‍यक जमाव, शिराओं में रक्‍त का या अन्‍य दुषित पर्दाथों के जम जाने आदि में इसका प्रयेाग करने पर वह इन्‍हे आसानी से निकाल देती है ।

सुजाक , गनोरिया :- सुजाक , गनोरिया जैसे जीर्ण रोगों की वजह से कोई भी अंग यदि निष्‍क्रिय हो गया हो तब इसके प्रयोग से अच्‍छे परिणाम मिलते है । सुजाक, गनोरिया में इसका प्रयोग अपनी सहायक औषधि जैसे वेन ग्रुप के साथ प्रयोग करना चाहिये ।, वेनेरियल डिसीस में , मवाद, बैक्‍टेरिया की वजह से पस फारमेशन हो रहा हो तब इसके प्रयोग से उचित परिणाम प्राप्‍त किये जा सकते है ,

मॉसपेशियों जोडों का र्दद गठिया, साईटिका :- गठिया ,जोडों का रोग, साईटिका ,मॉसपेशियों में र्दद ,चोट , मोच आदि में , टियूमर, गाढे ,गले की सूजन, टॉसिल ,पाईरिया, आदि में ।

पथरी किडनी या गॉल ब्‍लेडर :- पथरी चाहे किडनी में हो या गॉल ब्‍लेडर में यह पथरी को गला कर चूरा कर मूत्र मार्ग से निकाल देती है ।  पेशाब में रक्‍त आने पर या यू0टी0आई0 इंफेक्‍शन (संक्रमण) में इसके प्रयोग से उचित परिणाम प्राप्‍त किये जा सकते है । परन्‍तु यदि इसका प्रयोग रोग स्थिति के अनुसार अपनी सहायक औषधियों के साथ करने पर उचित परिणाम शीघ्र प्राप्‍त किये जा सकते है,

स्त्रिीयों के रोग :- स्त्रिीयों में ल्‍यूकोरिया होने पर इसका प्रयोग वेन-1,ए-2,एस-2,के साथ करने से बडे ही अच्‍छे परिणाम प्राप्‍त किये जा सकते है । महिलाओं के बच्‍चादानी के पी सी ओ डी में इसका प्रयोग अपनी सहायक औषधियों के साथ करने पर आशानुरूप परिणाम प्राप्‍त किये जा सकते है ।   

साइनोसाईटिस, जुखाम, छींके आना :- साइनोसाईटिस, जुखाम, छींके आना, हर समय बने रहने वाली सर्दी आदि में इसके प्रयोग से उचित परिणाम प्राप्‍त किये जा सकते है ।

ग्‍लैण्‍डस में आई सूजन व खराबी :- शरीर के सभी तरह के ग्‍लैण्‍डस ,थाईराईड हो या पेनक्रियास सभी की सूजन को दूर करती है और उसे ठीक कर देती है ।

रक्‍त संचार में आये किसी भी तरह के अवरोध को यह दूर करती है :- रक्‍त संचार में आये किसी भी तरह के अवरोध को यह दूर करती है । ह्रिदय में आई सूजन, क्‍लाट आदि को ठीक करती है ।

शरीर में सूजन किसी भी वजह से हो :- सूजन कैसी भी हो ,शरीर में पानी भर गया हो ,जोडों के सूजन में इसके अंतरिक एंव वाह्रय प्रयोग से उचित लाभ होता है ।

बजन घटाने में :- बजन घटाने में अपनी सहायक औषधियों जैसे एल-1,ए-3,जीई के साथ प्रयोग करने पर आशानुरूप परिणाम मिलते है ।

बबासीर, भगंदर :- यह सभी तरह के बबासीर, भगंदर आदि में इसका प्रयोग अपनी सहायक औषधियों के साथ कर अच्‍छे परिणाम प्राप्‍त किये जा सकते है । यह दवा धीरे धीरे कार्य करती है परन्‍तु परिणाम निश्‍चित है ।

डायलूशन का प्रयोग :- जैसाकि आप सभी जानते है कि किसी भी औषधि की मूल औषधि जिसे हम स्‍पेरिजिक ऐसेन्‍स कहते है यह तीब्र मात्रा है और अपने गुण धर्मो के अनुरूप परिणाम प्रर्दशित करती है ज्‍यों ज्‍यों हम इसके आगे के डायल्‍युशन जैस प्रथम डायल्‍यूशन यह भी स्‍पेरिजिक ऐसेन्‍स से कुछ कम परन्‍तु तीब्र है , द्धितिय डायल्‍यूशन प्रथम डायलुशन से कम तीब्र है । इसी प्रकार जैसे जैसे हम आगे के डायलूशन का प्रयोग करते है यह ऊचें डायल्‍युशन कहलाते है इसमें मूल औषधि की मात्र तो कम होती है परन्‍तु उच्‍च से उच्‍चतम डायल्‍यूशन तक पहूंचते पहूचते इसके कार्य करने की क्षमता बढ जाती है । जैसे एक उदाहरण है, यदि किसी फोंडें को फोडना है या शरीर से किसी दुषित पर्दाथ को निकालना है या पस फारमेंशन चालू करना है, तो हमे इस स्थिति में स्‍पेरिजिक या प्रथम, या दूसरे डायल्‍यूशन का प्रयोग करना पडेगा । यदि पस फारमेंशन को सुखाना है तो इसके हायर डायल्‍यूश्‍न का प्रयोग करना पडेगा।

प्रथम डायल्‍युशन :- इसका प्रथम डायल्‍युशन सभी तरह के फोडों ,गाढों को फोड कर पस को आसानी से निकाल देती है  ,गाढों व टियूमर व फोंडों को फाडने पकाने मवाद को निकालने में ,पथरी को तोडकर उसे चूरा कर निकाल देती है, लकवा,पोलियों, शुन्‍यपन,में इसका प्रथम डायल्‍युशन का प्रयोग कर उचित परिणाम प्राप्‍त किये जा सकते है ।

दूसरा डायल्‍युशन :- गठीया वात , मॉसपेशियों के दर्द,कैंसर के र्दद ,बबासीर के र्दद व मस्‍से आदि में इसका दूसरा डायल्‍युशन का प्रयोग किया जाता है ।  

तीसरा डायल्‍युशन :- गाढों को, पस को सुखाने में कोलिस्‍ट्राल, पथरी , सिस्‍ट तथा वेन में आये अवरोध को यह दूर कर देती है ।

हायर डायल्‍युशन :- किसी भी तरह के रिसाव को रोकने के लिये हायर डायल्‍युशन का प्रयोग करते है कैंसर के रिसाव को हायर डायल्‍युश्‍न अच्‍छा करती है , चोट गढिया,मोच जैसे दर्दो में इसके लगाने से र्दद दूर हो जाता है । साईटिका, मांसपेशियों के दर्द आदि में इसके प्रयोग से अच्‍छे परिणाम प्राप्‍त किये जा सकते है   

                        डॉ0 सत्‍यम सिंह चन्‍देल

                        बी0 एच0 एम0 एस0 , एम0 डी0 (ई0)

                            जन जागरण चैरीटेबिल हॉस्पिटल

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