पेट्रोरल्स -1 (पी-1)
पेट्रोरल्स -1 (पी-1)
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क्र0 |
औषधिय पौधों के नाम |
उपयोग मात्रये |
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1 |
ADIANTHUM CAPILI VENERIS (Hansraj)
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10 |
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2 |
ALLIUM CEPA (Red Onion, Lal Piyaj)
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20 |
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3 |
EUCALYPTUS GLOBULUS (Safeda, Neelgiri)
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10 |
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4 |
PHELLANDRIUM AQUATICUM
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30 |
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5 |
POLYGALA AMARA
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20 |
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6 |
URAGAGO
IPECACUANHA
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20 |
इस ग्रुप की सभी औषधियॉ श्वसन तंत अर्थात रिस्पायरेट्री सिस्टम पर कार्य करती है , इसीलिये इनका प्रयोग खॉसी, जुखाम, छीकें आन, एलर्जी, श्वास रोग दमा , आदि पर प्रयोग की जाती है । यह सामान्यत: दस वर्ष से ऊपर की आयु वाले पुरूषों की सामान्य खॉसी के लिये विषेश उपयोगी है । परन्तु किसी भी उम्र के स्त्री पुरूषों की प्रथम स्तर के श्वसन तंत्र के रोगों में प्रयेाग की जा सकती है , यह फेफडों की बलवर्द्धक पौष्टिक औषधी होने के कारण इसका प्रयोग फेफोंडों की दुर्बलता एंव लग्स को बलवर्द्धक बनाने में प्रयोग की जाती है । यह दवा अपने प्रभावित अंगों से किटाणों को बाहर निकाल देती है ।
इस दवा का प्रभाव श्वसनतंत्र के के अवयवों जैसे
लग्स , वायु
प्रणालीयों और उनकी छोटी छोटी केशिकाओं तथा वायु कोष्ठों पर एंव श्वसन तंत्र के श्लैष्मिक
कलाओं अर्थात म्युकस मेम्बरेन पर प्रभावी होने के कारण, श्वास लेने में कष्ट, स्वरभंग, श्वास अवरूद्धता, श्वास नलिकाओं में
सूजन ,गले में
खरास, टांसिल, सूखी या गीली खॉसी , कफ का गले में जमा होना,
काली खॉसी, कुकुर खॉसी, गले में छाले,लग्स का क्षय होना,
हलक का प्रदाह, निगलने में परेशानी,खॉसने पर रक्त आना,
जख्म आदि जैसे श्वसन तंत्र के रोगों में
इसका प्रयोग किया जाता है । श्वसन तंत्र में केाई भी खराबी आ जाने के कारण जो भी
बीमारीयॉ हो उसमें इसका प्रयोग किया जा सकता है । फेफडों का
कार्य है आक्सीजन को खीचना तथा कार्बन डाई आक्साईड को शरीर से निकाते रहना ,
जो प्राणीयों के जीवन का मुख्य आधार है, कुछ बीमारीयों में जो श्वसन तंत्र से सम्बधित
होते है उनमें कभी कभी श्वास लेने व आक्सीजन ग्रहण करने में बाधक बनते है उस
स्थिति में पी ग्रुप की दवाओं का प्रयोग अपनी सहायक औषधियों के साथ करने से बहुत
ही अच्छे परिणाम प्राप्त किये जा सकते है इन दवाओं के प्रयेाग से मरीज को आक्सीजन
देने की जरूरत भी नही पडती एंव इस दवा से हमारे लग्स मजबूत हो कर स्वयम
वातावरणसे आक्सीजन ग्रहण करने में सक्क्षम हो जाते है । श्वसनतंत्र से सम्बधित
किसी भी बिमारी की प्रथम स्टेज पर इसका प्रयोग किया जाता है । जैसे खॉसी ,
दमा ,गले में खरास , सूजन ,टांसिल ,जलन आदि में यह दवा ई0 एन0 टी0 अर्थात नाक कान गला
आदि के रोग जैसे नॉक ,ऑखों से पानी गिरना,
छीकों का आना कान से मवाद या पानी का स्त्रावों पर ,
यह दवा छाते तथा महिलाओं के ब्रीस्ट के रोग जैसे स्तन में गॉठों का बनना,
कैंसर , ,मॉ का दूध न उतरना , स्वर भंग ,इस
दवा का प्राकृतिक गुण कफ को ढीला कर निकालने वाला है ।
पी-1
पाचन तंत्र के रोगों में भी अच्छा कार्य करती है , छोटी ऑतों में र्दद ,
जी मचलाना , अफरा, कब्ज, कभी कब्ज तो कभी दस्त होना आदि में अपनी सहायक
औषधी एस-1के साथ प्रयोग कर अच्छे परिणाम प्राप्त किये जा सकते है ।
डायल्युशन
का प्रयोग :- प्रथम डायल्युशन का प्रयोग तीब्र सूखी,
एंव गीली खॉसी ,लग्स की सूजन , वायु प्रणाली की सूजन,
छॉती के समस्त रोगों में, कफ निकालने में, स्वरभंग,
गले के बैठ जाने में, फेफडों का पूरी तरह से श्वास न लेने पर ,इसका
प्रथम डायल्युशन का प्रयोग किया जाता है । प्रथम डायल्युशन हमारे फेफडों को उत्तेजित
करते है इससे श्वास लेने पर जो भी परेशानी होती है उसमें इसका प्रयोग किया जाता
है ।
दूसरा
डायल्युशन :- इसके दूसरे डायल्युशन का प्रयोग पुरानी एंव जीर्ण प्रकार की खॉसी,
दमा छाती के रोगों में जब फेफडे कमजोर हो गये हो, इन्फूएन्जा ,स्वर
यत्र की सूजन,
तीसरा डायल्युशन:’- इसके तीसरे डायल्युशन का प्रयोग पुराने रोगों में, नॉक की एलर्जी , श्वास लेने में परेशानी इस्नोफीलिया, आदि पर किया जाता है ।
बी0 एच0 एम0 एस0, एम0 डी0
(ई0)
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