कैंसरोसो-5
कैंसरोसो-5
इस औषधिय का
कार्य क्षेत्र विस्तृत है, सभी तरह के रोगों इसका प्रभाव में 90 प्रतिशत तक है ।
यह सैल्स एंव टिश्यूज रिमेडिज दवा है , इस दवा का प्रभाव समस्त
ग्रथियों के सैल्स एंव टिश्यूज साथ लीवर के सैल्स एंव टिश्यूज, पर अधिक है, इसके साथ यह स्पाईनल नर्व , तथा अंगों को संचालित
करने वाले नर्व पर सिम्फाईटिक नर्व , चालक पेशियों , मसल्स और नर्व के चालक
स्थानों पर है ,यह पाचन संस्थान, फेफडों और मॉसपेशियों के साथ
शरीर के सभी अवयावों को प्रभावित करती है, त्वचा के अंतरिक एंव
बाहय भागों को भी प्रभावित करती है । यह कैंसोरोस ग्रुप की सबसे शक्तिशाली दवा है
जिस प्रकार एस-5 स्क्रेाफोलोसो ग्रुप की शक्तिशाली एंव गहरा प्रभाव रखने वाली दवा
है , ठीक उसी
प्रकार यह अपने ग्रुप की एक शक्तिशाली दवा है । इस दवा का स्त्रीय पुरूष के रोगों
में ,दिमाकी
रोग किडनी रोग,लीवर , हड्डीयों के रोग, पथरी, बबासीर, गाठे, टयूमर, फाईब्राईड, टयूमर , सिस्ट , शिराओं, वक्षस्थल, मॉसपेशियों, पाचन के पोषक
तत्वों, संधिवात, मलाश्य,कर्ण आदि रोगों पर सफलतापूर्वक कार्य करती
है । इस दवा का प्राकृतिक गुण चोट,हिदय रोग,पेट के रोग,मूत्ररोग नाशक है , सी-5 किटाणुओं को नष्ट करती है, एंव रोगों से सुरक्षित रखने वाली
बलवर्धक पाचन क्रिया को सुधारने वाली रक्त शोधक दवा है ।
सैल्स एण्ड टिश्यूजएंव
त्वचा रोग :-
कैंसरोसो ग्रुप की सभी दवाये कोशिका एंव तन्तुओं के निर्माण कार्य की सहायक
औषधियॉ है इसी लिये इस दवा का प्रयोग शरीर में गांठों , सिस्ट ,टियूमर, तथा धॉव, मुंहासे, मस्से, त्वचा पर दाने निकलना,चर्म उद्भेभेद, आदि होने पर या त्वचा रोग जिसमें त्वचा के रंग
या बदरंगी त्वचा ,जीर्ण त्वचा रोग , ल्युकोर्डर्मा, सोराईसेस , विशैले धॉव, गैगरिन , यह धॉवों को पका कर सुखा देती है एंव
वहॉ की त्वचा का पुन: निर्माण कर उसे स्वस्थ्य बना देती है । कैसर किसी भी स्तर
का हो चाहे वह पॉचवे स्टेज का हो उसे स्वस्थय करने में पूर्ण रूप से सक्क्षम
है । शरीर में किसी भी तरह की कठोर गाठों को यह गला देती है या निकाल देती है ।
मॉसपेशियों का सूखना,
मूत्ररोग जेनाईटल आर्गन के
रोग :- केाई भी
ऐसा रोग जो मूत्र मार्ग से होता हुआ शरीर के किसी भी स्थान पर पहुंच गया हो , सभी तरह के ग्लैण्डस से
जुडे रोग ,पैराथाईराईड, प्रोस्टेट के रोग , हार्मोनल इन बैलेंस , एंव स्त्री पुरूष के
हार्मोन से जुडे सभी तरह के रोग,स्त्रीयों में पीरियड से जुडे रोग (माहवारी से जुडे रोग), यूटरस में टयूमर या गाठों
का होना या कैंसर, पुरूषों में र्स्पम काउन्ट का कम होना, इंपोटेंशी का कम होना, स्वप्न दोष , गलब्लैडर की समस्या , पथरी सी-1 के अर्न्तगत
आने वाले बहुत से रोग इस दवा के क्षेत्र में आ जाते है जैसे बांझपन , ल्युकोरिया, प्रसंव के समय स्त्रीयों
में अत्याधिक पीडा होना, गर्भाश्य की एंठन , माहवारी में पीडा होना , गर्भाश्य की सूजन, बहुमूत्र, मधुमेह रोगों में सी-17 के साथ प्रयोग
करना चाहिये , सुजाक रोग में वेन ग्रुप की दवाओं के साथ प्रयोग कर
उचित परिणाम प्राप्त किये जा सकते है । यह दवा मधुमेह के रोगियों के धॉवों को
भरने में उपयोगी है ।
र्दद :- कोई भी ऐसा रोग जो यूरिक ऐसिड ,कैटेनाईन या यूरिया की वजह
से हो,या शरीर
में टाक्सीन की वजह से हो, इसकी वजह से यदि हिद्य रोग हो गया हो या गठिया , जोडों में र्दद , कमर का र्दद , सरवाईकल स्पेन्डोलाइसेस, ऐडी का र्दद, हिप ज्वाईट का र्दद, सी-5 हड्डीयों की अच्छी दवा है , जोडों का कडा हो जाना
लीवर:- फैटी लीवर , एस0डी0, ओ0टी0 का बढना, हेपाटाईटिस, लीवर की सूजन या कडा होना, लीवर का फोडा
श्वसन रोग:- छाती के रोग साईनस की समस्या, झींके आना, नाक की हड्डी का बढ जाना, सायनोसाईटिस, पुरानी खॉसी, दमा, निमोनिया, तालु ग्रथियों की सूजन, स्वर यंत्रों की सूजन , गले सं सम्बन्धित समस्त
परेशानीयों में , निगलने में परेशानी, टांसिल का होना या बार
बार होना, फेफडों
की प्रदाह, एंव धॉव, वायु प्रणाली से दुर्गन्धयुक्त बलगम
का निकलना, मुंह के अन्दर के रोग , गले में धॉव, दॉतों के रोग, मसूढों का क्षय , मसूढों का सडना आदि में
इस दवा के कुल्ला या गरारे करने से एंव अंतरिक प्रयोग से बहुत ही अच्छे परिणाम
प्राप्त किये जा सकते है ।
अन्य रोग:- बच्चों का दांत निकलने में परेशानी , या बच्चों की लम्बाई का
न बढना , बच्चों के सूखा रोग में, बजन का न बडना , या यह दवा बजन बढाने एंव
घटाने में अपनी सहायक औषधियों के साथ प्रयोग करने पर बहुत ही अच्छे परिणाम देती
है । सभी तरह के बुखार के रोगों में, पुराने बुखार, टाईफाईड, चिकिनगुनिया, क्षय रोग ,ठंड देकर आने वाले बुखार , जलोदर, बहरापन, मोतिया बिन्द, डिप्थीरिया, फीलपांव,बालों का झडना, गठिया,लकवा एंव क्षय रोग में
इसका प्रयोग अपनी पूरक एंव सहायक औषधियों के साथ कर अच्छे परिणाम प्राप्त किये
जा सकते है ।
मस्तिक रोग:- ब्रेन से जुडे रोग जैसे नीद न आना, याददास्त का कमजोर होना, ब्रेन में टयूमर, गाठों का होना, मिर्गी के दौरे या मिर्गी
रोग , हिस्टीरिया, पागलपन, सिर की पीडा, आधाशीशी का र्दद,
पांचन तंत्र के रोग:- इस दवा का प्रभाव पाचन तंत्र पर
होने के कारण पुरानी अजीर्ण ,हिचकी आना , ऑतो में सूजन, पेचिस, पेट का फूलना, खटटी डकार का आना,जीर्ण अपच, आदि में इसका प्रयोग अपनी सहायक एंव
पूरक औषधियों के साथ कर अच्छे परिणाम प्राप्त किये जा सकते है ।
सी-5 की सहायक औषधियॉ एस-5, ए-2,एफ-1, पी-2 एंव जी0ई0 है तथा
इसकी पूरक औषधी एस-1,सी-1 एंव सी-3 है ।
डायल्युशन का प्रयोग:- प्रथम डायल्युशन:- फोडों को पकाने, गाठों को गलाने में , त्वचा के अन्दर के टाक्सीन
को निकालने में, इसके प्रथम
डायल्युश्न से गैस्टिक जूस का सिकरेशन बढ जाता है , रूके हुऐ एम सी को चालू
करता है, लम्बाई बढाने व बजन कम
करने में ,पॉचवी स्टेज के कैंसर में
दूसरा डायल्युश्न:- ल्युकोरिया, पीरियड की अनियमितता में , यूरीन की कोई भी समस्या
में, प्रोस्टेट
के बढ जाने में, हड्डीयों के र्दद, शाईटिका का र्दद , जोडों एंव मांस पेशियों
का र्दद हिद्रय के सभी तरह के रोगों में , हिदय में रूकावट , अवरोध,
तीसरा डायल्युशन:- हर तरह के ग्लैन्डस रोगों में मुंह
में सूजन, मुंह से
लार बहना,कान से
मवाद आना , ऑखों से पानी आना , नाक का बहना,
हायरडायल्युशन:- दिमाकी बीमारीयों में जैसे पागलपन , हिस्टीरिया, मिर्गी रोग ,लीवर की समस्या , किसी भी तरह के पुराने
रोग , पीरियड में पीडा होने पर
डॉ0
सत्यम सिंह चन्देल
बी0 एच0 एम0 एस0 , एम0 डी0
(ई0)
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