रिपेटरी विद्वान चिकित्सकों के अनुभव
रिपेटरी विद्वान चिकित्सकों के अनुभव
पाचनतंत्र के रोग:-
ऐसेडिटी (डॉ0ढीगरा):- एस-5, डी-30 के देने से किसी भी प्रकार की ऐसेडिटी हो तत्काल पाच से सात मिनट में लाभ होता है । या एस-1 खाने से
पहले तथा खाने के बाद एस-10 डब्लु ई देने से ऐसेडिटि में एंव पाचन सम्बधित रोगों
में चमत्कारी लाभ होता है ।
डॉ0 वेकेट कपूरम का कहना
है कि ऐसीडिटी गैस कब्ज व अल्सर होने पर एस-1,एफ-1 डी-3 में खाने से
पहले एंव एस-5 सी-10 डी-3 में खाने के बाद दे ।
कब्ज में :- जिद्दी प्रकार
के कब्ज में :- एस-1, एस लॉस, बी ई, बर-1 या एस-1,एस लॉस, वाई ई, बर-1 डी-3 में दिन में तीन बार
या आवश्यकतानुसार रात्री में एंव सुबह चाय से पहले गरम पानी के साथ देना चाहिये ।
डॉ0 ढीगरा का अभिमत है की कब्ज की हर प्रकार की स्थितियों में
एस-2 वर-1,एस लॉस, वाई ई, डी-3 में देने से जिद्दी से जिद्दी कब्ज में अराम होता
है ।
डॉ0 मनीष पाटीदार का कथन है कि कब्ज एक पाजिटिव रोग
है इसमें एस-1 दवा की 3 बूद 30 एमएल में
दे एंव एस लॉस को इसी प्रका से एक शीशी तीन बूंद 30 एमएल में ले एंव 105 झटके दे
दोनों दवाओं की 10 10 बूंदे दिन में तीन चार बार देने से कब्ज ठीक हो जाता है ।
डॉ0 एल एन सिन्हा का कथन है मल को निकाल आंतों को साफ करने में
एस-2, या सी-2, एस-5 या सी-10,एफ-1 का प्रयोग करने से कब्ज
ठीक हो जाताहै यह मल को आंतों से निकाल कर आंतों को साफ कर देता है ।
दस्तों में :-सी-3 कब्ज करने वाली दवा है जबकि इसके
विपरीत एस-2 कब्ज को दूर करने वाली दवा
है । इसलिये दस्तों में सी-3 दवा का प्रयोग किया जाता है । यह दवा दस्तों को बन्द
कर देती है ।
बबासीर भगंदर
बबासीर का मुंख्य कारण कब्ज है अत: बबासीर के उपचार से
सबसे पहले कब्ज को दूर करना चाहिये उपर बतलाई दवाओं से कब्ज को ठीक करे इसमें
एस-1एफ-1 को डी-6 में खाने से पहले दे एस-5, सी-10 को डी-6 में खाने के बाद दे ।
बबासीर में ए-2, सी-5, यदि रक्त स्त्राव हो रहा है तो इसमें बी ई और बादी हो
तो जी ई इसमें मिला दे तथा लगाने के लिये उपरोक्त दवाओें को ग्लीसरीन या
पेट्रोलियम जैली में मिला कर लगाना चाहिये । भगन्दर में भी यही फामूला का प्रयोग
किया जाता है ।
डॉ0 पाटीदार :- एस-5, सी-5, ए-2 यदि रक्त स्त्राव
हो रहा है तो इसमें बी ई और बादी हो तो जी ई इसमें मिला दे इचिंग होने पर एस-1, ए-1, सी-1 डी-2 में दे ।
बडे बडे मस्से क्रोनिक कंडिशन पर ए-2, सी-4, एस-5, वेन-1 डी-2 यदि अंगूर जैसे गुच्छे हो
तो ए-2, सी-5, सी-10, एल-1 बादी हो तो इसमें जी ई और रक्तस्त्राव
हो तो बी ई इसमें मिलाये ।
भगंदर:- बर-1 कही पर भी र्दद होने में यह दवा एन्टी
सेप्टक ,एन्टीस्पोसमेटिक
है इसका प्रयेाग डी-4 में करना चाहिये । एस-5, सी-5, वर-1, जी ई यह दवा नेगेटिव डायल्युशन में
प्रयोग करने से किसी भी प्रकार के भगंदर को ठीक कर देती है जलन होने या रक्तस्त्रावों
में इसमें बी ई को सम्मलित किया जा सकता है ।
दूसरी विधि ए-2, सी-5, एस-5, जी ई, डी-3 तीसरी विधि ए-2, सी-5, पी-2, जी ई, वर-1 डी-4 में इसका मलहम लगाये ।
पथरी
पेशाब का रूकना ,पेशाब में जलन, किडनी स्टोन, या गुर्दे की पथरी कितनी
भी बडी क्यो न हो एस-2,सी-2,ए-2
एस-6 किसी भी तरह के पथरी को बनने से रोकती है ।
एस-5 बडी से बडी
पथरी को चूरा कर गलाने व तोडने में उपयोग की जाती है । सी-17 किडनी से विजातीय
पदार्थो को निकाल देती है ।
डॉ0 ढींगरा :- एस-10 यह पित्त प्रकृति की दवा है अत:
गालब्लेडर में स्टोन पर यह दवा स्टोन को गलाने का कार्य करती है ।
एस-2 यह दवा
विशेषकर मूत्राश्य, गुर्दा, अमाश्य ,छोटी आंत और पित्त की
थैली पर अपना प्रभाव रखती है । इसलिये इसका प्रयोग मूत्राश्य और पित्तकी थैली की
पथरी में किया जाता है थोडे समय तक प्रयोग करने से पथरी बिलकुल गल कर निकल जाती है
।
बुखार
बुखार किसी भी प्रकार का हो एस-10, ए-3, एफ-1, बर-1, वाई ई डी-10 में देने
से किसी भी प्रकार का बुखार हो ठीक हो जाता है ।
दूसरी विधि:- एफ-1, बाई ई, वर-1,इस दवा को डी-3 में दिन में चार या तीन बार देना चाहिये
।
Comments
Post a Comment