कैंसरोसोस-10
कैंसरोसोस-10
कैंसरोसोस-10 में
प्रयुक्त औषधीय पौधे व उनकी मात्रायें निम्नानुसार है ।
|
क्र0 |
औषधिय पौधों के नाम |
उपयोग मात्रये |
|
1 |
CARDUOUS
BENEDICTUS |
10 |
|
2 |
CHELIDONIUM
MAJUS |
20 |
|
3 |
CONIUM MACULATUM |
10 |
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4 |
PIMPINELL
SEXIFRAGA |
50 |
|
5 |
PODOPHYLUM PELTATNUM |
20 |
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6 |
RHUS
TOXICODENDRON |
20 |
|
7 |
VINCETOXICUM
OFFICINALE |
20 |
पित्त प्रवृति के रोगीयों की यह
विशेष औषधी है , परन्तु रोग स्थिति के अनुसार इसका प्रयोग सभी प्रकृति के रोगीयों में
किया जा सकता है । सी वर्ग में केवल एक
यही औषधिय है जो नर्वस सिस्टम के अधिकाश सिस्टम को प्रभावित करती है जैसे सिम्फाईटिक
नर्व एंव पैरासिम्फाईटिक नर्व इन दोनों नर्व को सामान्य करने वाली वेगस नर्व पर
भी इसका प्रभाव होने से नर्व सिस्टम के अधिकाश रोग इसकी सीमा रेखा में आ जाते है
। इसके साथ यह स्नाय संस्थान एंव रीड की बोन से निकलने वाली स्पाईनल कार्ड पर
भी अपना प्रभाव रखती है जिसका प्रभाव हमारे समस्त स्नायु मंण्डल एंव निरंतर स्वयम
चलने वाले अवयव जैसे लीवर , स्पलीन , पेनक्रियाज ,स्टोमक ,डियूडिनम , छोटी बडी आंत पोर्टल वेन ,म्यूकस मेम्बरेन , ऐपेन्डेक्स , हिद्रय ,तथा लंग को
प्रभावित करने वाली स्नायुओं पर होता है , यह दवा सहायक स्नायु
को प्रभावित करने के कारण नेत्रों के तारो पर प्रभावी एक्युली मोटर स्नायु, सैलेवरी ग्लैन्ड
, ग्लोसोफैरिजियल
नर्व , आदि पर होने से इसका प्रभाव काफी बड जाता है । चूंकि इसकी सीमा में किडनी, यूरेनरी संस्थान, गाल ब्लैडर , रेक्टम , तथा सेकरल
पैरासिम्फाईटिक नर्व आ जाते है । जो एस-10 एंव एफ-1 की पूरक औषधिय है ,तथा यह वेन-1 एंव एस-2 की
सहायक औषधी भी है , सेन्ट्रल नर्वस सिस्टम पर कार्य करनेके कारण यह उससे
उत्पन्न हुई कई समस्याओं में यह अच्छा कार्य करती है जैसे नीद न आना , सिर र्दद ,या मानसिक अन्य परेशानियॉ, याददास्त की कमी ,चक्कर आना , में अपनी पूरक एंव सहायक
औषधियों के साथ अच्छा कार्य करती है ।
पाचन संस्थान के रोग:- जिस प्रकार एस-10 पाचन रोगों के अब्यवों पर कार्य करती है ठीक उसी प्रकार
यह पाचन अंगों के नर्व सिस्टम पर कार्य करती है ,अत: यह छोटी आंत बडी आंत से लेकर मल निष्कासन संस्थान
के उर्त्सजन तंत्र के नर्व सिस्टम पर कार्य करती है , इसीलिये हम कह सकते है कि
यह नर्व सिस्टम की औषधिय है । पाचन तंत्र से सम्बधित व्याधियॉ जैसे भोजन का न
पचना , कब्ज , मल का सूख जाना , वायु शूल, पतले दस्त ,कभी कब्ज कभी दस्त , अतिसार , इनडाईजेशन ,प्रमुख रोल निभाती है परन्तु
इसका प्रयोग अपनी पूरक औषधिय एस-10 के साथ करने पर बहुत ही अच्छे परिणाम प्राप्त
किये जा सकते है । लीवर हमारे शरीर का विशेष अंग है यदि लीवर ठीक से कार्य न करे
तो हमारे शरीर का मेटाबोलिज्म बिगड जाता है ,इसका प्रभाव शरीर के अंन्य
अंगों पर होने लगता है , हार्मोन्ल इन बैलेंस होने लगता है जिसकी बजह से हामोनल
इन बैलेंस की बजह से जो भी रोग होते है वह उत्पन्न होने लगते है , जैसे बजन का बढना, नीद न आना, कमजोरी ,सिर र्दद , याददास्त की कमी,चक्क्र आना, ज्वाईडिस ,डायजेस्टिव समस्याये उत्पन्न
होने लगती है , लीवर यदि ठीक से कार्य न करे तो इसका प्रभाव उपरोक्त
क्रिया पर तो होता ही है इसके साथ दूसरे अंग प्रभावित होने लगते है जैसे स्प्लीन, आंत , ह्रिदय , आदि अत: लीवर की सभी समस्याओं
में इसका प्रयोग आंतों की समस्या , ज्वाईडिस , पाचन तंत्र की खराबी , एंव पाचन तंत्र की खराबी
से उत्पन्न होने वाले रोगों में इसका प्रयोग अपनी पूरक औषधिय एस-10 के साथ करने
से आशातीत परिणाम प्राप्त किये जा सकते है । विद्धान चिकित्सक कहते है कि यह
आंतों की विशेष औषधी है । इसी लिये पाचन तंत्र के अधिकाश रोग इसकी सीमा में आ जाते
है , जैसे
कभी पतले दस्त होना तो कभी कब्ज होना , आंतों में मल का चिपक जाना ,या सूख जाना , आंतों में कीडे होना आदि में यह अपनी
पूरकऔषधी एंव सहायक औषधियों के साथ प्रयोग कर उचित परिणाम प्राप्त किये जा सकते
है ।
यह दवा गाल ब्लैडर एंव पित्त के निर्माण को बढाती है , यह पित्त के स्त्रावों
को बढाती है एंव सामान्य अवस्था मे लाती है , लीवर के कैंसर , गाठ , लीवर सोराईसिस, लीवर की सभी समस्याओं
में इसका प्रयोग अपनी सहायक औषधियों के साथ कर अच्छे परिणाम प्राप्त किये जा
सकते है । सी-10 एंव एस-5 एक दूसरे की पूरक औषधियॉ है ,
अन्य :- बच्चों या बडों में कभी दस्त या कभी कब्ज
रहने पर , आंतों
में आई खराबी के कारण पाचन दोष में , जैसाकि हमने पहले कहॉ है कि यह दवा
पित्त प्रकृति के अनुकूल है परन्तु रोग स्थिति के अनुसार यह किसी भी प्रकृति के
रोगीयों पर अपनी पूरक व सहायक औषधियों के साथ प्रयोग की जा सकती है । उल्टी ,मतली आदि में
गाल स्टोन :- यह गाल स्टोन को गलाने में अच्छा
कार्य करती है कुछ चिकित्सकों का अभिमत है कि एस-5 एव ए-3 के साथ यह स्टोन को
गलाने में अच्छा कार्य करती है ,
बच्चों के रोग:- हार्मोनल इन बैलेंस या किसीभी अन्य कारणों से
बच्चा यदि चिडचिडा हो क्रोध करता हो सामानों को फेक देता हो पेट में कीडे हो
जिससे शरीर में खुजली चलती हो दाने निकल आते हो , रात्री में चौकता हो या
पेशाब कर देता हो ,दॉत किडकिटाता हो, नाक खुजलाता हो यह सभी
लक्षण है ।
सी-10 लीवर की महान औषधिय है लीवर की खराब से उत्पन्न
रोग ,लीवर में
सिस्ट या गाठे ,
मधुमेह :- लीवर की वजह से उसके सहायक अंग जैसे
पेनक्रियाज पर असर होने से मधुमेह , या शुगर जैसी बीमारीयों में यह अपनी
सहायक औषधियों के साथ जैसे सी -17 के साथ प्रयोग की जाती है ।
डॉ0
सत्यम सिंह चन्देल
बी0 एच0 एम0 एस0 , एम0 डी0
(ई0)
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