पेट्रोरल्स -2 (पी-2)
पेट्रोरल्स -2 (पी-2)
पेट्रोरल्स -2 औषधी में
निम्न वनस्पतियों को एक निश्चित अनुपात में मिला कर बनाई गई है ।
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क्र0 |
औषधिय पौधों के नाम |
उपयोग मात्रयें |
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1 |
ADIANTHUM CAPILI VENERIS (Hansraj) |
15 |
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2 |
ALLIUM CEPA (Red Onion, Lal Piyaj) |
15 |
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3 |
EUCALYPTUS GLOBULUS (Safeda, Neelgiri) |
10 |
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4 |
GALEOPSIS OCHROLEUCA
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10 |
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5 |
GLECHOMA HEDERACEA
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10 |
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6 |
PHELLANDRIUM AQUATICUM |
20 |
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7 |
POLYGALA AMARA |
20 |
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8 |
TEUCRIUM SCORODONIA
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20 |
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9 |
URAGAGO IPECACUANHA |
20 |
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10 |
EQUISTICUM ERVENS (सी-2)
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10 |
पेट्रोरल्स -2 श्वसन तंत्र एंव फेफडों के रोगों की व्दीतीय अवस्था
के रोगों पर प्रयुक्त की जाती है । टी0बी0 ,ब्रोंकाईटिस, न्यूमोनिया , लंग
कैंसर, फेफडों में मवाद, कफ का न निकलना , अर्थात फेफडों से जुडे समस्त प्रकार के
रोगों में इस दवा का प्रयोग किया जाता है । फेफडों के एनाटामिकल्स या फिजियोलोजिकल
परिवर्तन फेफडों की बनावट में परिवर्तन सडन गलन या सूजन पानी का भर जाना आदि में
चूंकि हमारे फेफडों का कार्य है आक्सीजन को ग्रहण करना एंव कार्वन डाईआक्साईड को
निकालना आक्सीजन के कारण ही हमे उर्जा मिलती है शरीर के प्रत्येक कोशिकाओं तक
ऑक्सीजन पहुचती रहे तो हम स्वस्थ्य रहते है एंव ऑक्सीजन की कमी से विभन्न
प्रकार की समस्याये उत्पन्न होने लगती है । यह दवा जहॉ ऑक्सीजन की कमी को दूर
करती है वही श्वसन तंत्र से जुडे रोगों पर कार्य करती है एंव रूके हुऐ बलगम को
निकाल देती है फेफडों में पानी भर गया हो तो उसे भी आसानी से निकाल देती है । इस
दवा का हमारे मुंह के म्यूकस मैम्बरेन पर भी प्रभाव होने से मुंह के छॉलों व
मुंह के घॉवों को भरने में भी सहायक है । बीडी सिंगरेट से होने वाले लंग के दूसरे
स्टेज के कैंसर में उपयोगी है । निमोनिया में या निमोनिया में कफ अधिक बन रहा हो फेफडे
गल गये हो , फैफडों में गाढ बनना , खॉसी , दमा, बलगम फंसा हुआ हो , फैफडों से रक्त
आना , फैफडों का सुकड जाना , यह दवा जहा श्वसन तंत्र पर कार्य करती है वही छाती
की पीडा एंव हिद्रय रोगों पर भी अपनी सहायक औषधियों जैसे बी ई या ए ग्रुप के साथ प्रयोग
करने पर अच्छा
कार्य करती है । साईनोसाईटिस की समस्याओं पर , कान से मवाद आने पर भी इसका प्रयोग
किया जाता है । इस दवा का प्रभाव अण्डकोष एंव जननेन्द्रयों पर भी होने से अत्याधिक
कामवासना के कारण जो लोग र्दुबल या कमजोर हो जाते है उनके शरीर का क्षय होने लगता
है खॉसी आने लगती है ,अण्डकोषों में र्दद होना, सूजन होना ,आदि में भी इसका
प्रयोग अपनी सहायक औषधियों के साथ कर अच्छे परिणाम प्राप्त किये जा सकते है ।
वंशानुगत यदि टी0बी0 का इतिहास मिले तो इसका प्रयोग वेन समूह की दवा के साथ कर
उचित परिणाम प्राप्त किये जा सकते है । इसके अतरिक्त इसका प्रयोग निम्न रोगों
पर किया जाता है जैसे कफ का गाढा र्दुगंधयुक्त आना, स्वरभंग, स्वरभंग यंत्र में
र्दद काली खॉसी, फैफडों में रक्त का जमा
होना सूजन उसका क्षय होना ,
डायल्युश्न का प्रयोग :-
प्रथम डायल्युशन का प्रयोग सूखी खॉसी में , बलगम का फंसा हुआ होने पर उसे निकालने
के लिये , फैफडों में गॉढ सडन आदि में इसके पहले डायल्युशन का प्रयोग करना चाहिये
।
दूसरा डायल्युश्न –
इसका दूसरा डायल्युशन का प्रयोग सभी तरह की टी0बी फैफडों के सूजन ,
तीसरा डायल्युश्न – फैफडों
कैंसर, फैफडों से मवाद आना , निमोनिया,
ब्रोकाईटिस, ब्रोकाईटिस के साथ बुखार आने पर, ब्रेन में सूजन , मुंह में छॉले या
मुंह के म्यूकस मै म्बरैन में सूजन धॉव आदि पर किया जाता है ।
उच्च डायल्युश्न:-
पुरानी टी0बी0 ,फैफडों के दूसरी अवस्था के कैंसर , बच्चों के रोगों में ।
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