डायल्युशन क्या है
डायल्युशन क्या है
मैने अपने पहले वीडियों में इलैक्ट्रो होम्योपैथिक
की विस्तृत जानकारी देते हुऐ बतलाया था कि यह 114 वनस्पतियों से निर्मित सस्ती
सुलभ एंव दु:प्रभाव रहित (हानिरहित) चिकित्सा पद्धति है ,इसमें 38 मूल औषधियॉ एंव 22 मिश्रित औषधियॉ है ,जो इन्ही
38 मूल औषधियों को आपस में मिलाकर बनाई जाती है । हमारे बहुत से र्दशकों ने पूछा
है कि डायल्युशन क्या है कई साहित्यो में लिखा है कि किसी रोग विशेष में पहला
डायल्युशन या दूसरा ,तीसरा या उच्च डायल्युशन का प्रयोग करे ।
डायल्युशन :- सामान्य अर्थो में हम डायल्युशन
को तनुकृत या पोटेंशी (शक्ति या पावर ) कहते है । इसका प्रयोग होम्योपैथिक चिकित्सा
में भी किया जाता है । इसे समझने का प्रयास कीजिये उदाहरण के लिये औषधी की मूल
मात्रा (भौतिक मात्रा) अपने स्वाभाविक गुण धर्म के अनुसार तत्काल प्रभाव उत्पन्न
करती है , जैसे यदि आप मूलरूप में हो या स्पेरिक ऐसेन्स ( रस रूप में) के रूप
में र्मिची या तम्बाखू की मूल मात्रा या स्पेरिजिक ऐसेन्स, मदर टिंचर का उपयोग
करेगे तो इसका तत्काल भौतिक प्रभाव परिलक्षित होगा जैसे र्मिची के प्रयोग से मुंह
में जलन, ऑखों से ऑसू ,मुंह से लार निकलने
लगेगी, इसी प्रकार यदि आप तम्बाखू के मदर टिंचर (मूल रस) का प्रयोग करेगे तो आप
को चक्कर आने लगेगा,हिद्रय की धडकने बढ जायेगी एकदम पसीना आयेगा , इन औषधियों ने
अपना भौतिक प्रभाव तत्काल बतला दिया परन्तु यह भौतिक प्रभाव कुछ समय के लिये
होगा , औषधी का प्रभाव समाप्त होते ही वह पुन: सामान्य स्थिति में आ जायेगा ।
परन्तु यदि आप चाहते है कि यह भौतिक प्रभाव न हो एंव औषधी का प्रभाव लम्बे समय
तक बना रहे ,इसके लिये आप को क्वान्टम थेवरी अर्थात जिस वस्तु ( औषधी ) की मात्रा आप कम करते हुऐ माईनस शक्ति (तनुकृत) में
जायेगे तो आप देखेगे कि उसका भौतिक प्रभाव न होकर उसका तनुकृत या शक्तिकृत प्रभाव
होगा जो स्थाई और दीर्धकालीन होगा । इससे आप को तनुकृत या शक्तिकरण का सिद्धान्त
समझ में आ गया होगा , जैसे जैसे आप मूल औषधी की मात्रा को कम करते जायेगे उस औषधी
की शक्ति (पोटेंशी) बढती जायेगी ।
क्वाटम थेवरी के बारे में मै अलग से एक वीडियों
बनाऊगा उसमें आप इस सिद्धान्त को आसानी से समझ जायेगे ।
इलै0 होम्यो0
में इसीलिये दवाओं के प्रयोग में अलग अलग डायल्युशन के बारे में लिखा होता है
जैसे एस लॉस दवा का मूल रूप अर्थात स्पेरिजिक ऐसेन्स के रूप में प्रयोग करेगें
तो रोगी को दस्त होने लगेगा , इसी प्रकार कई औषधियों के मूल औषधी या प्रथम डायल्युशन
के प्रयोग से रोग में वृद्धि हो जाती है इसे
एग्रावेशन कहते है जैसे हिदय रोग में एन्जाईटिकोज समुह की दवाओं का प्रयोग प्रथम
डायल्युशन में न कर तीसरे या इससे ऊपर के डायल्युशन में किेये जाने के र्निदेश है , निम्न डायल्युशन का प्रभाव
भौतिक व तत्काल होता है इसे ऐग्रावेशन कहते है परन्तु उच्च से उच्चतम डायल्युशन
के प्रयोग से ऐग्रावेशन नही होता एंव दवा का प्रभाव स्थाई व दीर्धकालीन होता है ।
इलै0 होम्यो0 में प्रथम डायल्युशन से लेकर उच्च से उच्चतम डायल्युशन का
प्रयोग होता है जिसके बडे ही आशानुरूप परिणाम प्राप्त होते है ।
इलै0 होम्यो0 का नि:शुल्क अध्ययन यदि आप करना
चाहते है वो भी घर बैठे आप हमारे व्हाटसएप नम्बर या ईमेल पर हमे सूचित करे हम आप
को इसके नोटस भेजते जायेगे आप इसका अध्ययन करे जो समझ में न आये कमेन्ब् कॉलम
में लिखे जिसका समाधान हम यथासमय करने का प्रयास करेगे ।
डाँ.कृष्णभूषण सिंह चन्देल
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